chankya 8 lifechanging thought chankya 8 lifechanging thought thoughts in hindi chankya 8 lifechanging thought english chankya 8 lifechanging thought
चाणक्य की ये 8 बातें जान लो, वरना बाद में पछताओगे
किसी व्यक्ति का असली चेहरा कैसे पहचाने ?
चाणक्य
कहते है कि किसी मनुष्य के व्यवहार से उसके कुल का ज्ञान होता है अर्थात व्यवहार
से मनुष्य के कुल का पता लगाया जा सकता है। उसकी भाषा से उसके देश या प्रदेश का
ज्ञान होता है अर्थात वह रहता कहॉं है। मनुष्य के मान और सम्मान देने के तरीके
से पता लगाया जा सकता है कि उसका स्वभाव कैसा है एवं उसके शरीर को देखकर बताया जा
सकता है, कि
उसके खाने कि मात्रा कितनी है।
दुष्ट कि दुष्टता का क्या प्रभाव पड़ता है ?
सज्जन पुरूष कि क्या पहचान है ?
समुद्र
भी प्रलय आने पर अपनी मर्यादाओं का उल्लंघन कर पूरे प्रदेश मे फैल जाता है, परन्तु सज्जन व्यक्ति बड़ी से बड़ी मुसीबत
आने पर भी अपनी सीमा नहीं छोड़ते और न ही अपनी मर्यादाओं का उल्लंघन करते है।
अर्थात चाणक्य कहना चाहते है कि सज्जन व्यक्ति की सहनशीलता समुद्र से भी अधिक
होती है।
चाणक्य के अनुसार किसी कार्य को कब तक करना चाहिए ?
अत्यंत
रूपवती होने के कारण ही सीता का अपहरण हुआ, अधिक अभिमानी होने के कारण ही रावण मारा गया, अत्यधिक दान देने के कारण ही राजा बलि को कष्ट
उठाना पड़ा अर्थात चाणक्य कहना चाहते है कि किसी भी कार्य मे अति नहीं करनी चाहिए, अन्यथा हमेशा कष्ट ही उठाना पड़ता है ।
इसलिये हमेशा एक सीमा मे ही कार्य करना चाहिए, उससे अधिक आपको नुकसान पहुँचा सकता है।
पिता को बच्चो से कैसा व्यवहार करना चाहिए ?
चाणक्य ने एक पिता कि ओर संकेत करते हुए कहा है, कि पॉंच वर्ष की आयु तक उसे अपने पुत्र से प्यार करना चाहिए, दस वर्ष की आयु तक उसे उसकी गलतियों के लिये दण्ड भी देना चाहिए, परन्तु 16 वर्ष की आयु हो जाने पर उसे अपने पुत्र से एक मित्र के समान व्यवहार करना चाहिए। मित्र के समान व्यवहार से तात्पर्य है, कि उस पर किसी भी बात को लादना नहीं चाहिए, बल्कि उसे अपने तर्क और व्यवहारिकता के आधार पर समझाना चाहिए ।
ऐसा व्यक्ति कभी धोखेबाज नहीं हो सकता है?
चाणक्य
कहते है कि कोई भी अधिकारी लोभरहित नहीं होता है । जो व्यक्ति चतुर नहीं हो, वह कभी मधुर भाषी नहीं हो सकता है और जो व्यक्ति
मुँह पर साफ बोलता है, वह कभी धोखेबाज नहीं हो सकता है । क्योंकि
मुँह पर साफ बोलने वाला व्यक्ति सदैव सत्य बोलता है।
आपका वास्तविक शत्रु कौन नहीं है ?
मूर्ख
व्यक्ति विद्वानों को अपना शत्रु समझता है, निर्धन व्यक्ति धनवानों को अपना शत्रु समझता
है और विधवा स्त्री सुहागिनों को अपना शत्रु मानती है। अर्थात प्रत्येक व्यक्ति
अपने से विपरित स्थिति वाले व्यक्ति को अपना शत्रु मानता है। यह प्रकृति का नियम
है।
मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु कौन है ?
चाणक्य कहते है कि इस संसार मे कामवासना से बड़ा कोई भी रोग नहीं है। मोह से बड़ा कोई शत्रु नहीं है और ज्ञान से ज्यादा सुख देने वाली चीज इस संसार मे और कुछ नहीं है।इसलिये चाणक्य कहते है कि व्यक्ति को सदैव ज्ञान अर्जित करते रहना चाहिए।

COMMENTS